Vir Rupan Bari

वीर शिरोमणि रूपन बारी – इन्फोग्राफिक

वीर शिरोमणि रूपन बारी

बुंदेलखंड के एक गुमनाम नायक की शौर्यगाथा

12वीं

सदी के योद्धा

महोबा

के महान वीर

आल्हा-ऊदल

के समकालीन

चंदेलों का युग

रूपन बारी की कहानी 12वीं सदी के बुंदेलखंड में घटित हुई, जब चंदेल वंश का शासन था। उनकी राजधानी महोबा, वीरता और शौर्य का केंद्र थी, जहाँ राजा परमाल का दरबार महान योद्धाओं से सुशोभित था।

राजा परमाल के वीर मंडल

राजा परमाल
आल्हा
रूपन बारी
ऊदल

“डेढ़ पहर” का युद्ध: एक अद्वितीय चुनौती

रूपन बारी की सबसे बड़ी पहचान उनकी युद्ध की मांग थी। जब भी वह दूत बनकर जाते, तो अपने शुल्क (‘नेग’) के रूप में अकेले पूरी सेना से लड़ने का अवसर मांगते थे।

4.5
घंटे

अकेले युद्ध

1
योद्धा

बनाम पूरी सेना

100%
विजय

का संकल्प

शौर्य और पराक्रम की गाथाएं

आल्ह-खंड में रूपन बारी की वीरता के कई प्रसंग मिलते हैं, जहाँ उन्होंने अकेले ही असंभव को संभव कर दिखाया। यह चार्ट उनके कुछ प्रमुख अभियानों की कठिनाई और महत्व को दर्शाता है।

प्रमुख सैन्य अभियान

पहचान का परिवर्तन

बारी समाज की अस्मिता के प्रतीक

रूपन बारी केवल एक योद्धा नहीं, बल्कि बारी समुदाय की पहचान और गौरव के प्रतीक हैं। उन्होंने समुदाय की छवि को सेवाभाव से उठाकर ‘वीरत्व के गौरव’ तक पहुँचाया, जिससे वह ‘सेवक’ से ‘वीर शिरोमणि’ बन गए।

एक जीवंत विरासत

🗓️

रूपन बारी जयंती

उनकी विरासत को जीवित रखने के लिए प्रतिवर्ष 23 अक्टूबर को जयंती महोत्सव मनाया जाता है, जो समुदाय के लिए एकता का प्रतीक है।

📈

सामाजिक चेतना

उनका नाम समुदाय के सामाजिक उत्थान, शिक्षा और बेहतर अधिकारों की मांग के लिए एक प्रेरणा स्रोत बन गया है।

🤝

राजनीतिक एकता

रूपन बारी का प्रतीक समुदाय को राजनीतिक रूप से एकजुट करने और अपनी आवाज को बुलंद करने के लिए एक मंच प्रदान करता है।

© 2024 रूपन बारी इन्फोग्राफिक | डेटा-चालित श्रद्धांजलि

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