बारी समाज: जनसंख्या, भाषाई विविधता एवं सांस्कृतिक महत्व

परिचय

बारी समाज भारतीय समाज का एक मेहनतकश और सांस्कृतिक रूप से विविध समूह है, जिसकी ऐतिहासिक पहचान पत्तल-दोना निर्माण, कृषि, और पारंपरिक व्यवसायों से जुड़ी रही है। यह समाज सदियों से भारतीय सामाजिक संरचना का अभिन्न हिस्सा है, जिसने बदलते समय के साथ देश के अनेक हिस्सों में अपनी उपस्थिति दर्ज की है।

बारी समाज की वैश्विक एवं भारत में जनसंख्या

वर्तमान अनुमानों के अनुसार, बारी समाज की कुल वैश्विक जनसंख्या लगभग 6,47,000 के आसपास है। इसका अधिकांश हिस्सा भारत में ही निवास करता है। विभिन्न अध्ययन एवं रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत में बारी समाज की अनुमानित जनसंख्या निम्नलिखित है (कुछ आंकड़ों में विभिन्न स्रोतों के कारण मामूली अंतर हो सकता है):

राज्यअनुमानित जनसंख्या
उत्तर प्रदेश23,000
बिहार21,000
महाराष्ट्र90,000 (संभावित त्रुटि – सत्यापन आवश्यक)
मध्य प्रदेश74,000
झारखंड4,300
पश्चिम बंगाल1,900
राजस्थान1,900
उत्तराखंड1,000
उड़ीसा600
छत्तीसगढ़600
हरियाणा300
दिल्ली200

स्रोतों के अनुसार, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में इनकी सबसे अधिक उपस्थिति है।

भाषाई विविधता

बारी समाज बहुभाषी संस्कृति का परिचायक है। देश के विभिन्न राज्यों में निवास के कारण, यह समाज अनेक भाषाओं एवं बोलियों का प्रयोग करता है। प्रमुख 15 भाषाएं और अनुमानित बोलने वालों की संख्या इस प्रकार है:

भाषाअनुमानित वक्ता
हिंदी3,74,000
मराठी83,000
अवधी25,000
कनौजी7,200
मघई3,800
बघेली3,300
मैथिली3,300
छत्तीसगढ़ी2,100
भोजपुरी1,600
बंडेली900
ओड़िया500
मालवी400
मेवारी400
पंजाबी (Eastern)300
बंगाली(संख्या अस्पष्ट)

इस तरह, बारी समाज में लगभग 20 भाषाओं का प्रयोग होता है, जो इस समाज की सांस्कृतिक समृद्धि और लचीलेपन को दर्शाता है।

सांस्कृतिक विशेषताएँ और नई पीढ़ी के लिए संदेश

बारी समाज का अपना समृद्ध इतिहास, रीति–रिवाज, व पारंपरिक विशेषताएँ हैं। बदलते समय के साथ इस समाज ने शहरीकरण को अपनाया है, लेकिन अपने मूल सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़े रहना इसकी पहचान का हिस्सा है।

नई पीढ़ी के लिए संदेश:
अपनी सांस्कृतिक जड़ों, इतिहास और समाज की पहचान को जानना अत्यंत जरुरी है। इससे समाज सशक्त, जागरूक और एकजुट बनता है, जो आने वाले समय में समग्र प्रगति का मार्ग प्रशस्त करता है।

निष्कर्ष

बारी समाज का इतिहास, जनसंख्या और भाषाई विविधता यह दर्शाती है कि यह समाज न केवल मेहनतकश है, बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी अत्यंत समृद्ध है। सामाजिक पहचान, भाषाएँ और सांस्कृतिक एकता मिलकर इस समुदाय को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष स्थान प्रदान करती हैं। ऐसी जानकारी को प्रसारित करना अगली पीढ़ी के लिए गर्व और जानकारी का स्रोत बन सकता है—साथ मिलकर ही हम अपनी विरासत को आगे बढ़ा सकते हैं।

(यह जानकारी विभिन्न समाचार, समीक्षाएं, और सरकारी व सामाजिक रिपोर्ट्स तथा संजय जी के यूट्यूब वीडियो “बारी समाज की कुल आबादी और भाषाओं का ज्ञान” समेत अनेक स्रोतों के आधार पर संकलित की गई है।)
इस लेख को अपने परिवार और दोस्तों के साथ साझा करें, ताकि हर बारी समाज का व्यक्ति अपने समाज के बारे में जान सके।

लेखक: Ajay Kumar Verma

📚 स्रोत: YouTube वीडियो बारी समाज की कुल आबादी और भाषाओं का ज्ञान संजय जी

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